मरघटों की शांति

■■ मरघटों की शांति ■■


मौन रहकर

अंतर में

लहू को एक

उबाल दे


भय दिखाती हो

अगर मृत्यु तो

भुजबल से

उसको 

टाल दे


सुनाई दे 

हाहाकार तो 

जूझकर उनसे

कदमों को

मिलाकर ताल दे


बधिरों से भरी 

सभा में

ऊंची कर 

आवाज़ अपनी

मरघटों की शांति में

एक बवाल दे।


©® अलका 'सोनी'

बर्नपुर, पश्चिम बंगाल।

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